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बहुत पराजय लेकर बैठा

बहुत पराजय लेकर बैठा
किन्तु विजय का ठाव नही ।
जाने यह मन कब हारेगा
उत्साहित के पाँव कही ।।
अच्छा लगता नही है रुकना
किसी दम्भ के आगे झुकना ।
बहुत चुनौती मान चुका हूँ 
किन्तु नही आता है लुकना ।।
जब तक लक्ष्य नही मिल जाता
साँसे पल भर नही गवाता ।
भले गगन से दिनकर बरसे
किन्तु हमे गलना ना आता ।।
डॉ दीनानाथ मिश्र

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1 Comments

Renu

09-May-2023 06:31 PM

👍👍

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